यूनिसेफ के एसएमसी ने 50 घरों के वंचितों को लगवाया कोविड- 19 का टीका

यूनिसेफ के एसएमसी ने 50 घरों के वंचितों को लगवाया कोविड- 19 का टीका

– संवाद स्थापित कर किया जागरूक
– टीकाकरण अभियान में भ्रांतियां को दूर करने की जरूरत:

मधुबनी, 26 नवम्बर। वैश्विक महामारी कोरोना के संक्रमण से बचाव एवं रोक थाम के लिए सरकार द्वारा 18 वर्ष या इससे अधिक आयु के सभी लोगों को कोविड- 19 वैक्सीन की दो खुराक निश्चित समय अंतराल पर लगाया जा रहा है। जिले के सभी पात्र लाभुकों को कोविड- 19 वैक्सीन की दोनों खुराक लग सके इसके लिए स्वास्थ्य विभाग सहयोगी संस्थाओं डब्ल्युएचओ, यूनिसेफ, केयर इंडिया आदि एवं हितधारी संगठन आईसीडीएस के सहयोग से सतत् सहयोग ले रही है। सरकार समय-समय पर लोगों को कोरोना से बचाव के लिए लगाये जा रहे टीके को अधिक से अधिक लोगों को लगाने के लिए मेगा ड्रार्इव, महाअभियान, विशेष टीकाकरण दिवस आदि का आयोजन कर रही है। वहीं जिले में अभी हर घर दस्तक अभियान के तहत घर-घर जाकर वंचितों को कोविड- 19 का टीका लगाया जा रहा है।

संवाद स्थापित कर किया जागरूक-
यूनिसेफ के एसएमसी प्रमोद कुमार झा ने बताया लखनौर प्रखंड के दीप पंचायत के बलुआ मुस्लिम टोला में टीकाकरण के बारे में उन्हें जानकारी दी गई कि इस गांव के लोग कोविड- 19 का टीका लगवाने से इंकार कर रहें हैं। इसकी जानकारी होने पर प्रखंड स्तर पर वंचितों को कोविड- 19 टीका लगवाने के लिए यूनिसेफ की टीम वहाँ पहुंची लोग कोविड- 19 का टीका लगवाने से इंकार कर रहे थे। इंकार कर रहे लोगों से मिलकर उनके बीच कोविड- 19 टीका के प्रति फैली भ्रांतियों को दूर करने का प्रयास आरंभ किया गया।जहाँ 50 से अधिक लोग जिसमें 20 से अधिक गर्भवती एवं धात्री महिलाओं का टीकाकरण किया गया। इस क्रम में स्थानीय ग्रामीणों द्वारा कई प्रकार के प्रश्न पूछे गये। उन्होंने कहा कि उन्होंने सभी प्रश्नों को संयम के साथ सुना एवं इन प्रश्नों को उतने ही संयम के साथ बारी-बारी से उत्तर दिया। इस दौरान वहां मौजूद बुद्धिजीवियों, स्थानीय प्रतिनिधि, धार्मिक गुरूओं के साथ एक बैठक आयोजित किया गया। वहां भी ग्रामीणों द्वारा उनके बीच फैली भ्रांतियों को दूर किया गया। इन घरों में सैकड़ों की संख्या में पात्र लाभुक थे जो अब तक कोविड- 19 टीका का एक भी खुराक नहीं लिये थे। उन्होंने बताया इस दौरान पल्स पोलियो अभियान के दौरान इंकार घरों को जागरूक कर पल्स पोलियों की दवा पिलाने का अनुभव काफी काम आया। लोगों को उनके बीच जाकर समझाना कठिन है लेकिन असंभव नहीं है। उन्होंने बताया पल्स पोलियो अभियान के समय भी कुछ ऐसे ही मामलों से दो-चार होना पड़ा था। इसलिए उन्हें एहसास था कि कुछ देर ही सही लेकिन ये सभी कोविड- 19 का टीका लगवा लेंगे। धीरे-धीरे वंचितों के बीच फैली भ्रांतियाँ दूर होती गई और वे कोविड- 19 का टीका लगवाने को तैयार हुए।

टीकाकरण अभियान में भ्रांतियां को दूर करने की जरूरत:

यूनिसेफ एसएमसी प्रमोद कुमार झा ने बताया टीकाकरण के प्रति समाज में शहरी क्षेत्र के अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की कमी एवं जागरूकता की कमी के कारण भ्रांतियां अधिक है इन भ्रांतियों को दूर करने की आवश्यकता है उन्होंने बताया टीकाकरण अभियान की शुरुआत से कुछ लोगों में यह भ्रांतियां थी की टीका लगवाने के बाद लोग संक्रमित हो जाते हैं,बुखार आ जाएगा, बीमार पड़ जाएंगे, वैक्सीन के जरिए शरीर में कोरोना वायरस डाला जाता है, टीका लगने से कोरोना हो जाता है, ग्रामीण इलाकों में टीकाकरण की राह में कुछ इस तरह की अफवाह और भ्रांतियों का फैला हुआ है। इस जाल को जागरूकता के हथियार से विभाग काटने का प्रयास किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से इन भ्रांतियों को दूर करने के लिए कई ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। उन्होंने बताया इन भ्रांतियों को सामूहिक प्रयास से दूर करने की जरूरत है।

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