पोषण अभियान के अंतर्गत जिला अभिसरण समिति की जूम मीटिंग

पोषण अभियान के अंतर्गत जिला अभिसरण समिति की जूम मीटिंग आयोजित, कुपोषण व एनीमिया के दर में कमी लाने के निर्देश
• जिला पदाधिकारी की अध्यक्षता में हुई जिला अभिसरण समिति की बैठक
• स्वास्थ्य, आईसीडीएस, केयर इंडिया समेत कई विभागों के साथ हुई बैठक
• जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं में प्रतिवर्ष 2% की कमी लाना है लक्ष्य
• पोषण की कमी को सुधार लाना है अभियान का उद्देश्य

मधुबनी: 27 सितंबर
पोषण अभियान के तहत जिला अभिसरण समिति की बैठक जूम वीसी के माध्यम से जिलाधिकारी अमित कुमार की अध्यक्षता में आयोजित की गयी। बैठक में पोषण अभियान का क्रियान्वयन को लेकर जिले में संचालित विभिन्न गतिविधियों एवं कार्यक्रमों का अनुश्रवण एवं समीक्षा की गई। बैठक में जिला पदाधिकारी अमित कुमार ने सभी सीडीपीओ को निर्देश दिया कि अपने प्रखंड के सभी कुपोषित, अतिकुपोषित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें सरकार द्वारा दी जाने वाली सभी सुविधाओं का लाभ ससमय देना सुनिश्चित करें तथा सभी प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी को अनीमिया से ग्रसित लड़की और महिलाओं की सूची हर माह अनुमंडल पदाधिकारी को भेजे, ताकि अनुमंडल स्तर पर टास्क फोर्स गठित कर सभी कुपोषित/अतिकुपोषित बच्चों और एनिमिक महिलाओं को सरकारी द्वारा चलाई जा रही सभी लोक कल्याणकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जा सकें। जिला पदाधिकारी कहा विभिन्न विभागों के समन्वय से निर्धारित सीमा के अंदर बच्चों में अल्पवजन, बौनापन एवं दुबलापन के दर में कमी लाया जाना है। योजना को सफलतापूर्वक लागू करने के लिए विभिन्न विभागों- महिला एवं बाल विकास, स्वास्थ्य विभाग, ग्रामीण विकास, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग, खाद्य आपूर्ति एवं उपभोक्ता संरक्षण, पंचायती राज इत्यादि विभाग से समन्वय स्थापित करते हुए बच्चों के कुपोषण दर में प्रतिवर्ष 2% एवं किशोरी व महिलाओं के एनीमिया दर में प्रतिवर्ष 3% की कमी लाने में संयुक्त प्रयास किया जाएगा। अनुमंडल पदाधिकारी न ने निर्देश दिया कि पोषण अभियान के अंतर्गत निर्धारित लक्ष्य को ससमय हासिल करें। इसके लिए अंर्तविभागीय समन्वय स्थापित कर कार्य करने की आवश्यकता है।
इस बैठक में पंडौल, रहिका, बाबूबरही, राजनगर, खजौली और कलुआही सहित सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी, प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी, प्रखंड प्रबंधक-जीविका, प्रखंड प्रबंधक-केअर इंडिया, पोषण अभियान के सभी प्रखंड समन्वयक, प्रखंड परियोजना सहायक, महिला पर्यवेक्षिकायें शामिल हुई।

जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं में प्रतिवर्ष 2% की कमी लाना:
जिलाधिकारी ने कहा कि इस अभियान के अंतर्गत जन्म के समय कम वजन वाले शिशुओं में प्रतिवर्ष कम से कम 2% की कमी लाना है। इसका मुख्य उद्देश्य छोटे बच्चों महिलाओं और किशोरियों के कुपोषण को कम करना है। एनीमिया और गंभीर कुपोषण को रोकने के लिए कुपोषण की समझ लोगों में बढ़ाने के लिए जैसे स्तनपान मातृ पोषण और किशोरावस्था में पोषण कैसे बढ़ाया जाए उस जानकारी को प्रदान करने के लिए है।

पोषण की कमी को सुधार लाना है अभियान का उद्देश्य:
राष्ट्रीय पोषण अभियान बड़े पैमाने पर चलने वाला अभियान है जो कि बच्चों किशोरियों गर्भवती महिलाओं एवं स्तनपान कराने वाली माताओं में पोषण की कमी को सुधार लाना है। पोषण अभियान देश में मार्च 2018 से लागू किया गया है। इसके तहत लक्ष्य प्राप्त करने के लिए 3 वर्ष का समय निर्धारित किया गया है।

बच्चों में विकास की कमी, कुपोषण, एनीमिया का विशेष ध्यान:
आईसीडीएस के डीपीओ डॉ. शोभा सिन्हा ने बताया पोषण अभियान कार्यक्रम के तहत बच्चों में विकास की कमी कुपोषण एनीमिया ना हो उसका विशेष ध्यान रखना है इस अभियान को जन आंदोलन स्वरूप प्रस्तुत किया गया है। पोषण अभियान के तहत कुछ वर्षों में अलग-अलग निगरानी कर के लक्ष्य को हासिल किया जाएगा।

क्या है उद्देश्य:
• इस योजना के तहत 0 से 6 वर्ष के बच्चों में बौनापन को कम करना
• 0 से 6 वर्ष के बच्चों में कुपोषण के कारण वजन की कमी की समस्या में कमी लाना
• 5 से 59 महीनों वालों छोटे बच्चों में रक्ताल्पता की कमी की समस्या में कमी लाना
• इस योजना के तहत 15 से 49 आयु वर्ग की किशोरियों एवं महिलाओं में एनीमिया की समस्या में कमी लाना
• नवजात शिशु के जन्म के समय वजन में कमी की समस्या में कमी लाना

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