नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को सुदृढ कर शत-प्रतिशत लक्ष्य को किया जायेगा हासिल

नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को सुदृढ कर शत-प्रतिशत लक्ष्य को किया जायेगा हासिल

• आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं में से एक है नियमित टीकाकरण
• 12 तरह के बीमारियों से बचाव के लिए दिया जाता है टीका
• आरआई दिवस पर नियमित टीकाकरण पर विशेष जोर

मधुबनी,24 सितंबर।
जिले में वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के बीच अन्य स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए विभाग प्रयासरत है।आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं में सबसे महत्वूपर्ण कार्यक्रम नियमित टीकाकरण है। नियमित टीकाकरण कार्यक्रम को सुदृढ़ करने तथा इसके लक्ष्य को शत प्रतिशत हासिल करने के लिए विभाग प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक संजय कुमार सिंह ने पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है। जारी पत्र में कहा गया है कि कार्यक्रम अंतर्गत 12 प्रकार की जानलेवा बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण किया जाता है। नियमित टीकाकरण के आच्छादन में गिरावट होने से जानलेवा बीमारियों के संक्रमण के बढ़ने की संभावना बनी रहती है। छूटे हुए बच्चों में वैक्सीन प्रीवेंटबल डिजिज के संक्रमण का खतरा बढ़ गया है।आरआई दिवस (बुधवार एवं शुक्रवार) को नियमित टीकाकरण का कार्य अनिवार्य रूप से कराया जाए।

नियमित टीकाकरण में तेजी लाने के लिए रणनीति विकसित करें:

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सचिव राजेश भूषण ने निर्देश दिया है कि नियमित टीकाकरण में तेजी लाने के लिए रणनीति विकसित करें ताकि महामारी और संबंधित शमन गतिविधियों के कारण उभरने वाले टीकाकरण अंतराल को दूर किया जा सके। नियमित टीकाकरण (आरजे) के लिए विशिष्ट दिनों की पहचान की जानी चाहिए और गतिविधियों की योजना इस तरह से बनाई जानी चाहिए कि समय, कार्यबल की भागीदारी आदि के संबंध में आरआई का कोविड टीकाकरण गतिविधियों के साथ कोई ओवरलैप न हो।

नियमित टीकाकरण बंद नहीं हुआ:
डीआईओ डॉ. एस.के विश्वकर्मा ने बताया कि नियमित टीकाकरण बंद नहीं किया गया है। लेकिन कोरोना की वजह से लोग कम आ रहे हैं। नवजात व गर्भवती का टीकाकरण कार्य जारी है। प्रखण्ड के विभिन्न पंचायत क्षेत्र स्थित सभी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर रोस्टर के अनुसार एएनएम द्वारा सभी टीका लगाए जाने का प्रावधान है। क्षेत्र स्थित सेविकाओं से मिली जानकारी के अनुसार कोरोना काल मे भी केन्द्र पर टीका दिया जा रहा है। डीआईओ ने आंगनबाड़ी केन्द्रों पर गर्भवती व नवजात छोटे बच्चों को टीका दिए जाने की बात कही।

शिशुओं का संपूर्ण टीकाकरण है जरूरी:
इस समय नवजात शिशुओं के भी स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। जिसमें उनका सम्पूर्ण टीकाकरण करा कर उन्हें भविष्य में होने वाली कई बीमारियों से सुरक्षा प्रदान की जा सके। बच्चे के जन्म पर बीसीजी, ओरल पोलियो वैक्सीन और हेपेटाइटिस बी का टीका देना है। छह हफ्ते पर पेंटावेलेंट, 10 हफ्ते पर पेंटावेलेंट ओपीवी टू , रोटावायरस टू,14 हफ्ते पर पेंटावेलेंट, ओपीवी थ्री, रोटावायरस थ्री, आईपीवी टू, पीसीवी टू दिया जाना है। वहीं 9 से 12 महीनों पर खसरा और रूबेला वन टीका देना है। 16 से 24 महीनों पर खसरा, डीपीटी बूस्टर वन, ओपीवी बूस्टर और 5 से 6 साल पर डीपीटी बूस्टर टू का टीका देना है। इसके बाद 10 साल पर और 16 साल पर टेटनस एंड एडल्ट डिप्थीरिया का टीका दिया जाना है।

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