टीबी उन्मूलन के लिए 2 माह तक चलेगा अभियान, गतिविधियों का कैलेंडर जारी

टीबी उन्मूलन के लिए 2 माह तक चलेगा अभियान, गतिविधियों का कैलेंडर जारी
• समुदायस्तर पर चलाया जायेगा जागरूकता अभियान
• 30 सितंबर तक निक्षय पोषण योजना की राशि का करें भुगतान
•एसटीएस, एसटीएलएस, एलटी को कोविड कार्य से मुक्त रखने के निर्देश
• पुनर्वास केन्द्रों में भर्ती बच्चों में टीबी की स्क्रीनिंग

मधुबनी,13 सितंबर । जिले में टीबी उन्मूलन के लिए समुदाय स्तर पर व्यापक अभियान चलाया जायेगा। सितंबर से अक्टूबर माह तक होने वाली गतिविधियों का कैलेंडर जारी किया गया है। इसको शत-प्रतिशत अनुपालन के लिए राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यपालक निदेशक ने पत्र जारी कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिया है। जारी पत्र में कहा गया है कि जनवरी माह में एक्टिव केस फाइंडिंग द्वारा टीबी रोगियों के नोटिफिकेशन एवं उपचार प्रारंभ कर वैश्विक महामारी के कारण कार्यक्रम की उपलब्धियों पर पड़े प्रतिकूल प्रभाव को कम करने का सफल प्रयास किया गया था । वर्तमान में कोविड के सक्रिय केस की संख्या बहुत कम हो गये हैं तो राष्ट्रीय यक्ष्मा उन्मूलन कार्यक्रम की प्रखण्डवार उपलब्धियों की समीक्षा कर दो माह तक अभियान के रूप में एक्टिव केस फाइंडिंग एवं निक्षय पोषण राशि का भुगतान करने के लिए सभी प्रखण्ड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारियों को एसटीएस, एसटीएलएस,एलटी को टीबी कार्य सम्पादन करने के लिए कोविड कार्य से मुक्त रखने के लिए कहा गया है।

30 सितंबर तक निक्षय पोषण योजना की राशि का करें भुगतान:
पत्र के माध्यम से निर्देश दिया गया है कि सभी पंजीकृत टीबी रोगियों जिनको एक भी बार डीबीटी लाभ का भुगतान नहीं हुआ हैं उनका निक्षय पोषण राशि का भुगतान 30 सितम्बर तक पूरा करना सुनिश्चित करें। इसके लिए डीपीएम एवं सीडीओ हर सप्ताह के अन्त में समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे ।

एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम के तहत टीबी रोगियों की स्क्रीनिंग :

एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम के अन्तर्गत प्रतिवेदित सभी डायबिटीज, गुर्दा रोग से पीड़ितों एवं अन्य उच्च जोखिम युक्त समूहों की लाइनलिस्टिंग करना एवं आशा / एएनएम के माध्यम से ऐसे रोगियों में टीबी लक्षणों की पहचान की जायेगी । इसके लिए गैर संचारी रोग एवं संचारी रोग पदाधिकारी (यक्ष्मा) हर सप्ताह के अन्त में समीक्षा कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करेंगे ।

पुनर्वास केन्द्रों में भर्ती बच्चों में टीबी की स्क्रीनिंग:
जिले एवं अनुमण्डल स्तर के कारागृह, सुधारगृह, बाल संरक्षण गृह, पोषण पुनर्वास केन्द्रों में भर्ती बच्चों में टीबी की स्क्रीनिंग तथा जाँच करना सुनिश्चित करेंगे। शहरी मलिन वस्तियों, महादलित टोला, नव निर्मित कार्यस्थलों पर काम कर रहे श्रमिकों में टी.बी. की स्क्रीनिंग तथा जाँच सुनिश्चित की जायेगी ।

दुर्गम व कठिन क्षेत्रों में किया जायेगा विशेष फोकस:

दूरस्थ एवं चिह्नित कठिन क्षेत्रों में आशा एवं अन्य सामुदायिक उत्प्रेरक की दो सदस्यीय घर-घर विजिट टीम को गठन कर प्रतिदिन कम कम 50 घर का भ्रमण द्वारा संभावित टीबी रोगियों की पहचान करेंगे एवं स्थानीय निकटतम बलगम जाँच केन्द्र अथवा ट्रूनेट लैब में सैम्पल की जाँच करवाना सुनिश्चित करेंगे। प्रखण्ड के प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी के साथ समन्वयन कर गृह भ्रमण टीमों के सदस्यों को रुपये 100/- प्रति दिन / प्रति सदस्य (पचास घरों के भ्रमण हेतु) के दर से प्रोत्साहन राशि का भुगतान किया जायेगा। सभी पंजीकृत टीबी रोगियों का घर भ्रमण कर सम्पर्क में रहने वाले 5 वर्ष तक के बच्चों एवं व्यस्कों में टीबी की स्क्रीनिंग करेंगे तथा योग्य बच्चों एचआईवी व्यस्कों एवं बच्चों की लाइन लिस्टिंग करना सुनिश्चित करेंगे।

दिवाल लेखन व आईईसी के माध्यम से किया जायेगा जागरूक:

टीबी से बचाव के प्रति लोगों में जागरूकता लायी जायेगी । इसके लिए विभिन्न माध्यमों से प्रचार-प्रसार किया जायेगा। दिवाल लेखन, बैनर-पोस्टर, हैंडबिल के माध्यम से जागरूकता संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जायेगा। इसके साथ सामुदायिक बैठक में भी लोगों को जागरूक किया जायेगा। इस बैठक में हर वर्ग के लोगों को शामिल किया जायेगा।

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