घायल पक्षी का इलाज़ और संरक्षण” विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा

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“घायल पक्षी का इलाज़ और संरक्षण”
विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा
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“बिजली से घायल पक्षियों को डिहाइड्रेशन से बचायेँ”

पटना, 12 सितंबर, 2021
पर्यावरण एवं पक्षी संरक्षण की दिशा में काम कर रही ‘हमारी गौरैया और पर्यावरण योद्धा’ द्वारा आज “घायल पक्षी का इलाज और संरक्षण” विषय पर ऑनलाइन परिचर्चा का आयोजन किया गया।
परिचर्चा में अतिथि वक्ता भागलपुर एवं बांका वन प्रमंडल के पशु चिकित्सा पदाधिकारी डॉ संजीत कुमार ने कहा कि हम जब भी किसी घायल पशु-पक्षी को देखें तो सबसे पहले हमें उनका घरेलू उपचार करना चाहिए। जैसे, पानी और चीनी का घोल बनाकर पक्षी को देने से तेजी से सुधार संभव होता है। या फिर पॉलिबिन ( Polybion) या नेउरोबिओन (Neurobion) दवा जो बहुत ही सस्ती है देनी चाहिये। अगर ब्लीडिंग हो रही हो तो ऐसे में हल्दी का लेप या फिटकिरी लगाने से खून निकलना बंद हो जाता है। डॉ कुमार ने कहा कि अगर किसी जंगली पक्षी का इलाज कर रहे हों तो इलाज उपरांत उसे तुरंत छोड़ देना चाहिए नहीं तो उसे ऐसा महसूस होगा कि वह किसी शिकारी के चपेट में आ गया है और हम अनजाने में उसकी जान बचाने के बजाय नुकसान ही कर देंगे। उन्होंने कहा कि इंटरनेट या विशेषज्ञों के माध्यम से जानकारी प्राप्त करके घायल पशु-पक्षियों को खाना देना चाहिए। उन्होंने कहा कि पशु-पक्षियों के सरंक्षण के तो नियम बहुत बने हुए हैं, लेकिन हम जन-जागरूकता के तरीके से ही बेहतर समाधान कर सकते हैं।
परिचर्चा को संबोधित करते हुए अतिथि वक्ता गंगा प्रहरी, संरक्षक, पशु-पक्षी प्रेमी एवं शिक्षक ज्ञानचंद ज्ञानी ने कहा कि वह अपने परिवार की तीसरी पीढ़ी हैं, जो पर्यावरण और पर्यावरणीय जीवों के संरक्षण में अपना योगदान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर हमें शुद्ध वातावरण चाहिए तो सबसे पहले वातावरण के सभी निवासियों यानी पशु-पक्षियों एवं जीव-जंतुओं का संरक्षण करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें जीव-जंतुओं के प्रति संवेदना का भाव रखना होगा। उन्होंने कहा कि समय के साथ-साथ हमलोग प्रकृति से दूर होते चले जा रहे हैं। एक समय था जब हम छाँव को देखकर समय बता दिया करते थे। पीपल की पूजा किया करते थे। कौओ की भाषा समझ जाया करते थे। लेकिन यह सब खत्म होता जा रहा है। उन्होंने कहा कि जीव-जंतुओं की संख्या घटने से प्रकृति में असंतुलन पैदा हो गया है। उन्होंने कहा कि इकोसिस्टम के संरक्षण में सभी का योगदान बेहद जरूरी है।श्री ज्ञानी ने कहा कि असली शांति शुद्ध वातावरण और पशु-पक्षियों के बीच ही है, ना कि सुविधायुक्त बंद कमरों में या कंक्रीट के जंगलों में।
हमारी गौरैया के संयोजक और गौरैया संरक्षक-लेखक संजय कुमार ने परिचर्चा का संचालन करते हुए कहा कि हम आए दिन सड़क किनारे किसी ना किसी पक्षी या पशु को घायल अवस्था में देखते हैं, लेकिन हमारे हाथ उनकी मदद के लिए कभी आगे नहीं बढ़ते और ऐसे में उनकी मौत हो जाती। हमें यह समझने की आवश्यकता है कि प्रकृति के जीव-जंतुओं और मनुष्यों के बीच परस्पर संबंध हैं। हमारा और उनका जुड़ाव प्रकृति का निर्माण करता है। लिहाजा हमें उनकी देखभाल और सुरक्षा ठीक वैसे ही करनी चाहिए, जैसे हम अपनों परिवारजनों का करते हैं।
धन्यवाद ज्ञापन देते हुये पर्यावरण योद्धा,पटना के अध्यक्ष निशान्त रंजन ने कहा कि पक्षियों और पर्यावरण के संरक्षण के लिये सबको मिलकर काम करना होगा। परिचर्चा के दौरान देश भर से, पक्षी प्रेमी शुभम कुमार, सोनू कुमार, आकाश दत्त, अनिकेत राज आदि ने घायल पक्षियों के उपचार और संरक्षण पर सवाल पूछे गये सवाल का जवाब वक्ताओं ने दिया। मौके पर पवन कुमार सिन्हा, तरुण कुमार रंजन, रंजीत कुमार सिंह, राजेंद्र प्रसाद ,जिज्ञासा सिंह, नीतीश चंद्रा ब्रांड एनसी, अमित कुमार पांडे, एस रिजवी पंकज कुमार, अरविंद कुमार, हरिलाल प्रसाद, आशीष नेहरा, राजेश राज, पल्लवी श्रीवास्तव, रवी प्रकाश, विमलेंदु सिंह सहित कई गणमान्य लोग जुड़े रहे।

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