ऐतिहासिक राजनगर महल को संरक्षित किया जाय -प्रोफेसर बिनोद चौधरी

*ऐतिहासिक राजनगर महल को संरक्षित किया जाए…….. प्रोफेसर विनोद चौधरी*

 

जमीदारी उन्मूलन से पूर्व राज दरभंगा का वह महल जिसमें महाराज का मुख्य कार्यालय हुआ करता था आज उस के अस्तित्व पर ही संकट मंडरा रहा है। पूर्व विधान पार्षद प्रोफेसर विनोद कुमार चौधरी ने इस ऐतिहासिक महल के संरक्षण हेतु ठोस कार्रवाई करने की मांग सरकार से की है। जमीनदारी प्रथा समाप्त होने से पहले राजनगर श्री विश्वेश्वर सिंह के शासन के अधीन था। उनके निधन के बाद स्वर्गीय राजकुमार जिवेशवर सिंह एवं राजकुमार शुभेश्वर की इच्छा के अनुरूप नारायणपट्टी निवासी देवानंद झा के प्रयास से 1971 से इस ऐतिहासिक महल में महाविद्यालय चल रहा है। विशेश्वर सिंह जनता महाविद्यालय राजनगर के नाम से चल रहा यह महाविद्यालय ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय का एक अंगीभूत इकाई है तथा स्नातक स्तर की पढ़ाई यहां हो रही है दुख की बात यह है कि न तो सरकार ने इस महल के संरक्षण के लिए विश्वविद्यालय को कोई आर्थिक मदद अब तक दी है और न विश्वविद्यालय की ऐसी स्थिति है कि वह इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कोई उपाय करें। जिस कारण यह ऐतिहासिक महल धीरे-धीरे जर्जर होते हुए आज नष्ट होने के कगार पर पहुंच चुका है। केंद्र एवं राज सरकार को मिथिला के इस ऐतिहासिक धरोहर की रक्षा के लिए विशेष पहल करनी चाहिए। इस महल का यदि संरक्षण सरकार अपने हाथ में ले तो राजनगर राज्य का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है। इसी परिसर में एक प्रसिद्ध काली मंदिर भी है जिसमें आज भी सैकड़ों भक्त दर्शन एवं पूजन के लिए पधारते हैं। खुशी की बात यह है कि 2 दिन पूर्व राज दरभंगा के कुमार कपिलेश्वर सिंह इस महल को देखने के लिए पहुंचे।

 

पूर्व प्रधानाचार्य प्रोफेसर हीरा आचार्य ने उन्हें पूरे कॉलेज का परिभ्रमण कराया। कुमार कपिलेश्वर सिंह महल की जर्जर स्थिति को देखकर काफी दुखी हुए। निश्चय ही कुमार कपिलेश्वर सिंह अपने स्तर से भी महल
के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए विभिन्न सरकारी एवं गैर सरकारी एजेंसियों से बात करेंगे।

 

मिथिलांचल की जनता ने लोकसभा एवं विधानसभा चुनाव में एनडीए को जैसा प्रबल समर्थन किया उससे यहां की जनता भी सरकार से इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण की अपेक्षा रखती है। क्षेत्र के सभी जनप्रतिनिधियों को इस संबंध में सरकार का ध्यान आकृष्ट कराना चाहिए।
इस बीच बिहार विधान परिषद के पूर्व सदस्य प्रोफेसर विनोद कुमार चौधरी ने भी बिहार के मुख्यमंत्री श्री नीतीश कुमार का ध्यान इस ऐतिहासिक धरोहर की ओर आकृष्ट करते हुए उनसे इसके संरक्षण एवं संवर्धन के लिए ठोस पहल करने की मांग की है।

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